पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ को मंगलवार को विशेष अदालत ने मौत की सजा सुनाई।

इस्लामाबाद// पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ को मंगलवार को विशेष अदालत ने मौत की सजा सुनाई। मुशर्रफ ने 3 नवंबर 2007 में संविधान को स्थगित कर इमरजेंसी लागू कर दी थी। इस मामले में उनके खिलाफ दिसंबर 2013 में सुनवाई शुरू हुई थी। मार्च 2014 में उन्हें देशद्रोह का दोषी पाया गया। हालांकि,अलग-अलग अपीलीय फोरम में मामला चलने की वजह से सैन्य तानाशाह का मामला टलता चला गया। मुशर्रफ ने धीमी न्याय प्रक्रिया का फायदा उठाते हुए मार्च 2016 में पाकिस्तान छोड़ दिया और दुबई चले गए।

मुशर्रफ ने 1999 से 2008 तक पाकिस्तान में शासन किया। वे पाकिस्तान के पहले सैन्य शासक हैं, जिनके खिलाफ कोर्ट में मामला चलाया गया। पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो और लाल मस्जिद के धार्मिक गुरु की हत्या के मामले में उन्हें भगोड़ा घोषित किया जा चुका है

मुशर्रफ सजा से बचने के लिए हाईकोर्ट में पहले ही याचिका दायर कर चुके
जनरल मुशर्रफ ने पिछले हफ्ते अपने वकीलों के जरिए लाहौर हाईकोर्ट में अपील दर्ज कराई। इसमें उन्होंने हाईकोर्ट सेविशेष अदालत में अपने खिलाफ चल रही सुनवाई को रुकवाने की मांग की। मुशर्रफ का कहना था कि उन्होंने हाईकोर्ट में पहले ही विशेषअदालत के गठन के खिलाफ याचिका दी है। इसमें उन्होंने अपने खिलाफ केस की मंशा पर सवाल उठाया था।

बीमारी की दलील देकर पाकिस्तान लौटने में असमर्थतता जता चुके हैं मुशर्रफ

मुशर्रफ को पाकिस्तान की हाईकोर्ट और विशेष अदालत कई बार समन जारी कर चुके हैं। हालांकि, वे हर बार दुबई से ही बीमारी का बहाना बनाकर पाकिस्तान लौटने से इनकार कर देते हैं।हाल ही में मुशर्रफ ने अस्पताल से एकवीडियो जारी किया। इसमें वेबिस्तर पर लेटे-लेटे कहते हैं,“देशद्रोह का केस बेबुनियाद है। गद्दारी छोड़िए, मैंने तो इस मुल्क की कई बार खिदमत की है। कई बार जंग लड़ी। 10 साल तक सेवा की। आज मेरी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मेरे खिलाफ जांच के लिए कमीशन बनाया गया। बेशक बनाइए। लेकिन, इस कमीशन को यहां आकर मेरी तबियत देखें और बयान दर्ज करें। इसके बाद कोई कार्रवाई की जाए। कमीशन की बात कोर्ट भी सुने। उम्मीद है कि मुझे इंसाफ मिलेगा।”

यह मुशर्रफ की सबसे ताजी तस्वीर है, उन्होंने कहा था कि विशेष अदालत भी मेरे वकीलों को नहीं सुन रही

√*जनरल परवेजमुशर्रफ पर 2007 में संविधान को स्थगित करने के मामले मेंराजद्रोह का आरोप लगाया गया,

√*मुशर्रफ के वकील ने सुनवाई के दौरान कहा था- वे देश लौटनाचाहते हैं, लेकिन खराब तबीयत के कारण नहीं आ सकते,

√*मुशर्रफ ने 1999 से 2008 तक शासन किया, बेनजीर भुट्टो और धार्मिक गुरु की हत्या के मामले में भगोड़ा घोषित किए गए,

मिल गया चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का मलबा, क्रैश साइट से 750 मीटर दूर NASA ने तलाशे 3 टुकड़े

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर को लेकर बड़ा खुलासा किया है. NASA ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि उसके उसका लूनर रिकनैसैंस ऑर्बिटर (LRO) ने चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर को ढूढ़ लिया है.

NASA के दावे के मुताबिक चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का मलबा उसके क्रैश साइट से 750 मीटर दूर मिला. मलबे के तीन सबसे बड़े टुकड़े 2×2 पिक्सेल के हैं. NASA ने रात करीब 1:30 बजे विक्रम लैंडर के इम्पैक्ट साइट की तस्वीर जारी की और बताया कि उसके ऑर्बिटर को विक्रम लैंडर के तीन टुकड़े मिले हैं.

नासा के मुताबिक विक्रम लैंडर की तस्वीर एक किलोमीटर की दूरी से ली गई है. इस तस्वीर में सॉइल इम्पैक्ट भी देखा गया है, तस्वीर साफ तौर पर देखा जा सकता है कि चांद की सतह पर जहां विक्रम लैंडर गिरा वहां सॉइल डिसटर्बेंस (मिट्टी को नुकसान) भी हुआ है.

बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने नासा से संपर्क साधा है और विक्रम लैंडर के इम्पैक्ट साइट की जानकारी मांगी है. जानकारी के मुताबिक नासा इसरो को एक पूरी रिपोर्ट सौंपेगा जिसमें विक्रम लैंडर से संबंधित ज्यादा जानकारी मिल सकेगी.

इससे पहले अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने विक्रम के बारे में सूचना देने की उम्मीद जताई थी, क्योंकि उसका लूनर रिकनैसैंस ऑर्बिटर (एलआरओ) उसी स्थान के ऊपर से गुजरने वाला था, जिस स्थान पर भारतीय लैंडर विक्रम के गिरने की संभावना जताई गई थी.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने इससे पहले कहा था कि उसका एलआरओ 17 सितंबर को विक्रम की लैंडिंग साइट से गुजरा था और उस क्षेत्र की हाई-रिजोल्यूशन तस्वीरें पाई थीं.

बता दें कि इससे पहले नासा के लूनर रिकनैसैंस ऑर्बिटर कैमरा (एलआरओसी) की टीम को लैंडर की स्थिति या तस्वीर नहीं मिल सकी थी. उस दौरान नासा ने कहा था, ‘जब लैंडिंग क्षेत्र से हमारा ऑर्बिटर गुजरा तो वहां धुंधलका था और इसलिए छाया में अधिकांश भाग छिप गया. संभव है कि विक्रम लैंडर परछाई में छिपा हुआ है. एलआरओ जब अक्टूबर में वहां से गुजरेगा, तब वहां प्रकाश अनुकूल होगा और एक बार फिर लैंडर की स्थिति या तस्वीर लेने की कोशिश की जाएगी.’

बीते अक्टूबर महीने की शुरुआत में विक्रम के उतरने के स्थान का नासा के अंतरिक्ष यान द्वारा उतारे गए चित्रों में लैंडर नहीं दिखाई दिया था. जिसके बाद यह कहा गया था कि नासा भी विक्रम लैंडर का पता नहीं लगा पाया. लेकिन सोमवार की रात नासा ने यह जानकारी दी कि उसे विक्रम लैंडर मिल गया है.

भारत के भारी रॉकेट, जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लांच व्हिकल-मार्क 3 ने 22 जुलाई को 978 करोड़ रुपये लागत का एक टेक्स्ट बुक स्टाइल का चंद्रयान-2 अंतरिक्ष में लांच किया था. चंद्रयान-2 अंतरिक्षयान में तीन हिस्से थे -ऑर्बिटर (2,379 किलोग्राम, आठ पेलोड), विक्रम (1,471 किलोग्रमा, चार पेलोड), और प्रज्ञान (27 किलोग्राम, दो पेलोड).।

हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों पर हमला, पांच घायल, एक नेता का कान चबाया

हांगकांग: हांगकांग में एक हमलावर ने कुछ लोगों पर चाकू से हमला किया। फरार होते समय उसने लोकतंत्र समर्थक एक नेता का कान चबा लिया। इस हमले में पांच लोग घायल हो गए जिनमें से दो की हालत गंभीर है।

समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, पिछले पांच महीनों से सरकार में सुधार की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शनों को रोकने के लिए दंगा रोधी पुलिस ने कई माम्ल्स पर छापेमारी की।

यह जानलेवा हमला हांगकांग के सिटीप्लाजा के व्यापारिक परिसर के बाहर हुआ। स्थानीय मीडिया के अनुसार, हमलावर ने पीड़ितों से कहा कि हांगकांग चीन का हिस्सा है।

टेलीविजन फुटेज में दिखाया गया कि हमलावर जिला पार्षद एंड्रयू चियू के कान को चबा रहा है। दरअसल हमलावर लोगों पर हमला करने के बाद भागने की फिराक में था और चियू ने उसे पकड़ने की कोशिश की थी। घटना के बाद लोगों ने उसके साथ मारपीट की और पुलिस के हवाले कर दिया।

नेपाल सरकार ने अपने सभी राज्यों के राज्यपाल को किया बर्खास्त

काठमांडू: नेपाल की संघीय सरकार ने रविवार देर शाम सभी सातों राज्यों के राज्यपालों को एक झटके में बर्खास्त कर सबको चौंका दिया है। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट से मिली।

रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार देर शाम मंत्रिमंडल की आपातकालीन बैठक में इस आशय का फैसला लिया गया। ये सभी राज्यपाल कांग्रेस काल में नियुक्त किए गए थे, जबकि अभी देश में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार है। विदित हो कि देश में नई सरकार बनने के बाद से इन राज्यपालों को हटाने की चर्चा चल रही थी, लेकिन सरकार गठन के दो वर्ष बीतने के बाद अचानक सरकार ने यह फैसला लिया है।

मरियम को लाहौर हाईकोर्ट ने दी जमानत

लाहौर: चौधरी चीनी मिल मामले में लाहौर हाईकोर्ट ने सोमवार को पीएमएल-एन की उपाध्यक्ष मरियम नवाज को जमानत दे दी है। अदालत ने पिछले दिनों उनकी जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट से मिली।

विदित हो कि इस मामले में मरियम को पिछले आठ अगस्त को गिरफ्तार कर लिया गया था। लाहौर हाईकोर्ट की खंडपीठ के न्यायाधीश अली बकर नजफी और सफदर अहमद नईम ने फैसला सुनाया। अदालत में मरियम और राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो के वकील मैजूद थे।

समाचार पत्र डॉन के मुताबिक, अदालत ने मरियम को जेल से रिहा होने के लिए एक करोड़ रुपये का बांड भरने, अतिरिक्त सात करोड़ रुपये जमा करने और पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है। उल्लेखनीय अभियोजन पक्ष ने मरियम के 28-11-2011 का बैंक स्टेटमेंट अदालत में पेश किया जिसके मुताबिक याचिकाकर्ता ने सात करोड़ रुपये बैंक से निकाले थे। इस पर अदालत को शंका हुई कि वह देश छोड़कर बाहर भाग सकती हैं। यही वजह है कि जमानत की इतनी बड़ी राशि ली गई। खंडपीठ के फैसला आने के बाद अदालत के बाहर खड़े मरियम के समर्थकों ने जमकर जश्न मनाया।

किसानों और घरेलू उद्योग के हित में मोदी सरकार ने आरसीईपी समझौते को ठुकराया

बैंकॉक/नई दिल्ली: नरेन्द्र मोदी सरकार ने देश के किसानों और घरेलू उद्योग की रक्षा करने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसले में दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक समझौते व्यापक क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) में शामिल नहीं होने का फैसला किया है।

  • समझौते से भारत के लोगों का जीवन और रोजी-रोटी भी होती प्रभावित

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुनिया के प्रमुख आर्थिक दृष्टि से बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के सम्मेलन में घरेलू उद्योगों की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस साझेदारी के साथ जुड़ने से इनकार कर दिया। भारत को आशंका है कि समझौते से भारतीय बाजार में विदेशी विशेषकर चीन निर्मित सस्ता माल की भरमार हो जाएगी और घरेलू उत्पादों से जुड़े बाजार पर बुरा असर पड़ेगा।

विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) विजय ठाकुर सिंह ने सम्मेलन में प्रधानमंत्री के संबोधन और भारत के रुख के बारे में मीडिया को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत ने इस बात की भी समीक्षा की है कि प्रस्तावित समझौता न्यायसंगत और संतुलित है या नहीं। अपने आकलन के आधार पर भारत ने समझौते में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। भारत ने मौजूदा आर्थिक हालात कोर भी फैसला लेते समय ध्यान में रखा है।

सचिव (पूर्व) के अनुसार प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस समझौते से भारत के लोगों का जीवन और रोजी-रोटी विपरित रूप से प्रभावित होती। मोदी ने महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए कहा कि कोई भी फैसला करने के पहले यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि उससे समाज के सबसे गरीब और उपेक्षित तबके को फायदा हो। समझौते में शामिल नहीं होने का फैसला महात्मा गांधी की इसी सीख पर आधारित है। मोदी ने कहा कि भारत आसियान और इस क्षेत्र के देशों के साथ व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने मोदी सरकार से आग्रह किया था कि वह इस समझौते पर हस्ताक्षर न करें। यह समझौता भारत सहित 16 देशों के बीच होना था। इसमें दक्षिण पूर्व एशिया सहयोग संगठन आसियान के दस देशों के अलावा जापान, चीन, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं।

सरकार की सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन में कहा कि यह समझौता संतुलित और उचित नहीं है। समझौते के पीछे की मूल भावना को नजरअंदाज किया गया तथा भारत की ओर से जाहिर की गई चिंताओं की ओर ध्यान नहीं दिया गया है। मोदी ने कहा कि भारत अपने मूलभूत राष्ट्रीय हितों की अवहेलना नहीं कर सकता। इस फैसले से भारत ने अपने कृषि क्षेत्र और खाद्य सुरक्षा से जुड़े हितों की रक्षा की।

सूत्रों के अनुसार समझौते में अंधाधुंध आयात को रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय नहीं किए गए हैं। दूसरे देशों के बाजारों में पहुंच और सीमा शुल्क से रियायत का कोई विश्वसनीय प्रावधान नहीं किया गया है। मोदी ने सम्मेलन में व्यावहारिक रवैया अपनाया उन्होंने जहां एक ओर भारत के गरीबों के हितों की रक्षा पर जोर दिया, वहीं भारत के सेवा क्षेत्र को विदेशी बाजारों में पहुंच सुलभ कराने पर जोर दिया। मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत स्पर्धा पर आधारित विश्व व्यापार के खिलाफ नहीं है।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह दिन बीत गए जब व्यापार मुद्दों पर भारत विश्व शक्तियों के दवाब में झुक जाता था। अब भारत आगे ‘फ्रंटफूट’ पर खेलता है। भारत व्यापार घाटे और अन्य देशों के बाजारों में भारतीय सेवा क्षेत्र की पहुंच और निवेश को महत्व देता है।

सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे किसान व्यापारी पेशेवर लोग और उद्यम सभी के हित ऐसे समझौते के साथ जुड़े हैं। समतुल्य क्रय शक्ति के आधार पर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और उसका विस्तृत बाजार है। सरकार भारत के कामगारों और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर फैसले करती है। सूत्रों की मानें तो भारत को आरसीईपी के सर्वाधिक तरजीह देश संबंधी प्रावधान पर आपत्ति थी। इसके तहत भारत को आरसीईपी के देशों को ऐसी ही रियायत देनी पड़ती।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत क्षेत्रीय एकीकरण को और मजबूत बनाना चाहता है। साथ ही मुक्त व्यापार और नियम आधारित विश्व व्यवस्था कायम करने के पक्ष में है। आरसीईपी वार्ताओं की शुरुआत से ही भारत ने वार्ता प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर भाग लिया है। सात वर्ष पूर्व शुरू हुई इन वार्ताओं की अवधि के दौरान दुनिया की अर्थव्यवस्था और कारोबार में बहुत बदलाव आया है ,जिनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती। समझौता वार्ता के प्रारंभ में व्यक्त मूल भावना मौजूदा समझौते में पूरी तरह परिलक्षित नहीं होती।

आरसीईपी को लेकर कांग्रेस के हमले के जवाब में सरकार की ओर से कहा गया कि मनमोहन सरकार के दौरान आसियान देशों के लिए भारत का 74 प्रतिशत बाजार खोल दिया गया, जबकि इंडोनेशिया जैसे धनी देशों ने भारत के लिए केवल 50 प्रतिशत बाजार खोला। मनमोहन सरकार ने ही वर्ष 2007 में भारत और चीन मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता करना स्वीकार किया तथा वर्ष 2011-12 में आरसीईपी वार्ताओं में शामिल होने का फैसला किया।

पीएम मोदी ने जापान के पीएम शिंजो आबे से की मुलाकात

नई दिल्ली: पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने सोमवार को भारत-आसियान शिखर बैठक के अवसर पर जापान के पीएम शिंजो आबे से अलग से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच पिछले चार महीनों में यह तीसरी भेंट है। इनकी पिछली मुलाकात सितम्बर 2019 में व्लादिवोस्‍तोक में हुई थी।

आज की मुलाकात के मौके पर पीएम मोदी ने आबे को जापान के सम्राट की हाल में हुई ताजपोशी के लिए बधाई दी। इस समारोह में राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद के शरीक होने को गर्मजोशी के साथ याद किया। मोदी ने कहा कि वह भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्‍मेलन के लिए अगले महीने भारत में पीएम आबे का स्‍वागत करने के लिए उत्‍सुक हैं। उन्‍होंने यह भी कहा कि भारत-जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और गहरा बनाने में आगामी वार्षिक शिखर सम्‍मेलन की सफलता को लेकर वह आश्‍वस्‍त है।

दोनों नेताओं ने भारत और जापान के बीच उच्‍च स्‍तरीय बैठकों के माध्‍यम से आर्थिक साझेदारी को प्रोत्‍साहित किए जाने का स्‍वागत किया। दोनों ने मुंबई-अहमदाबाद हाई स्‍पीड रेल परियोजना में हुई प्रगति की समीक्षा की और परियोजना के सुचारू कार्यान्‍वयन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

मोदी और आबे ने इस महीने के आखिर में भारत में दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच होने वाली बैठक को लेकर खुशी जाहिर की और कहा कि इससे दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। दोनों नेताओं ने नियम आधारित मुक्त, खुले और समावेशी भारत-प्रशांत क्षेत्र के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों भारत प्रशांत क्षेत्र के साथ ही विकासशील देशों की शांति, समृद्धि और प्रगति के साझा उद्देश्यों के लिए द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमत हुए।

न्यूयॉर्क सिटी मैराथन दौड़ में निगाहें केन्याई मैरी किटनी पर

न्यूयॉर्क: दुनिया की लोकप्रिय प्रतिस्पर्धाओं में अग्रणी न्यूयॉर्क सिटी मैराथन दौड़ में रविवार को सबकी निगाहें एक बार फिर घर में झाड़ू-बर्तन और सफाई करने वाली केन्याई बाई मैरी किटनी पर होंगी। वह लंदन और न्यूयॉर्क सिटी सहित सात मैराथन जीत चुकी हैं। पांच फुट दो इंच लम्बी और 93 पौंड वजनी मैरी किटनी कहती हैं- मैं अपने दिल में अगले वर्ष टोक्यो ओलिंपिक मैराथन में स्वर्ण पदक जीतने का स्वप्न संजोए हूं। 37 वर्षीय मैरी किटनी ने दो घंटे 22 मिनट और 48 सेकेंड में मैराथन चुकी हैं। यह ओलिंपिक मैराथन में स्वर्ण पदक जीतने के लिए अच्छा समय है।

मैरी दो बच्चों जारेड (11) और सगांठा (6) की मां होने के साथ व्यावसायिक भी हैं। वह जब भी मैराथन दौड़ में हिस्सा लेती हैं, तो अपने पति चार्ल्स कौच और बच्चों के साथ जाती हैं। उनके सामने इस बार दौड़ में प्रबल प्रतिद्वंद्वियों में ओलंपिक विजेता अमेरिका की डेस लिंडन और इस साल की बोस्टन मैराथन विजेता वोरकनेश डेगेफा हैं।

रिकार्ड की दृष्टि से पुरुष वर्ग में ईथोपिया के लेलिसा डेसिसा का 42 मील की इस दौड़ में 2ः05ः29 सेकेंड का आठ वर्ष पुराना रिकार्ड है। महिला वर्ग में केन्या की मैरी किटनी का 2ः22ः48 सेकेंड का रिकार्ड है। किटनी यह दौड़ तीन बार जीत चुकी हैं। इसमें पुरुष-महिला विजेता को एक-एक लाख डालर और उप विजेता को साठ-साठ हजार डालर का पुरस्कार दिया जाता।

इस दौड़ को देखने के लिए लाखों खेलप्रेमी सुबह सड़क पर जमा हो जाते हैं। दौड़ स्टेटन आईलैंड से शुरू होती है। मुख्य दौड़ में पहले महिला दौड़ और फिर पुरुष दौड़ आधे घंटे के अंतराल में सवा नौ बजे प्रारंभ होती है। इसका दुनिया भर के खेल चैनलों पर सीधा प्रसारण होता है। इसमें अंतिम धावक को अधिकतम साढ़े आठ घंटे का समय मिलता है। न्यूयॉर्क पुलिस के भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच यह दौड़ जैसे-जैसे ब्रुकलिन, मैनहटन और क्वींस के रास्तों से गुजरती है, तो इसका नजारा ही कुछ और होता है।

केन्या और ईथोपिया के जांबाज धावकों की दिनचर्या का यह एक हिस्सा है। वह लंबी दूरी के धावक बनने के लिए अपने देश के कंकरीले, पथरीले, बीहड़ और जंगलों में मीलों चल कर, कूद-फांद कर अपने काम को अंजाम देते हैं। इनमें केन्याई धावक मैरी किटनी ने भी प्रतिदिन बीस किलोमीटर कूद-फांद कर अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की थी और परिवार में रोजी-रोटी का संकट खड़ा हुआ तो अपने माता-पिता की मदद के लिए घर से दूर झाड़ू-पोंछा करने में कभी परहेज नहीं किया। वह कहती हैं- ऐसे समय में मैं जब भी घर गई, मीलों पैदल चल कर अपने साथ मां-बाप छोटे भाई-बहनों के लिए राशन पानी का इंतजाम कर चलती थी।

इस दौड़ के विभिन्न आयु वर्ग में भारत सहित 100 से अधिक देशों के 50 हजार से अधिक मैराथन धावक और धाविकाएं हिस्सा लेते हैं। इनमें कुछ नामी हस्तियों में फिल्मकार, उद्यमी और धन जुटाने वाले परोपकारी निवेशक भी होते हैं। यह निवेशक मेट्रो रेल सेवा के लिए धन संग्रह की अपील करते हैं और प्रतिवर्ष करीब दस करोड़ डालर किटी में जमा करते हैं। टाटा कन्सल्टेंसी सर्विसेज भी प्रतिवर्ष इस मैराथन दौड़ में लाखों डालर प्रायोजन राशि के रूप में देती है। यह दौड़ सन 1970 में शुरू हुई थी, तब इसमें प्रवेश शुल्क मात्र एक डालर था। आज इस दौड़ में भाग लेने वाले धावकों को न केवल कठिन प्रक्रिया से गुजरना होता है, बल्कि प्रति धावक को प्रवेश शुल्क के रूप में 255 डालर देना होता है। इसके बावजूद हर साल एक लाख से अधिक उदीयमान धावक और धाविकाओं में से पंद्रह प्रतिशत को ही मौका मिल पाता है।

मैरी किटनी बताती हैं- मेरे भाग्य ने उस समय दस्तक दी, जब वह परिवार की रोजी-रोटी के लिए अथक परिश्रम कर रही थी। एक दूर के रिश्तेदार ने नेशनल हिडन टेलेंट अकादमी में भर्ती करवा दिया, जो नैरोबी में थी।वहां एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने लगीं। वहां धावक बनने का मौका मिला। 2006 में स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद केन्या के मशहूर धावक लिन्हा चेश्यर के ट्रेनिंग कैंप में चली गई।

मैरी ने शुरू में हाफ मैराथन जीती। फिर एक उदीयमान धावक के रूप में उसे एक गैरलाभकारी ‘ शू 4 अफ्रीका ‘ संस्था ने अपना लिया। जहां एक अन्य केन्याई प्रमुख धावक टोबी टांसेर के मार्गदर्शन में एक लैब स्टूडेंट के रूप में लंबी दूरी के धावक की ट्रेनिंग के साथ आगे बढ़ने का मौका मिला । आज मैरी किटनी केन्या की सर्वश्रेष्ठ मैराथन धावक हैं। मैरी ने 2017 में लंदन मैराथन में दो घंटे सत्रह मिनट और 01 सेकेंड के साथ सर्वश्रेष्ठ समय दिया था। अभी विश्व रिकार्ड भी केन्याई धावक महिला ईलिड 2ः01ः39 का है।

थाइलैंड में अपनापन नजर आता है : पीएम नरेंद्र मोदी

बैंकॉक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को निमिबुत्र स्टेडियम में स्वास्दी पीएम मोदी कार्यक्रम में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि थाईलैंड के कण-कण और जन-जन में अपनापन नजर आता है। ये रिश्ते दिल, आत्मा, आस्था और आध्यात्म के हैं। भारत का नाम पौराणिक काल के जम्बूद्वीप से जुड़ा है, जबकि थाईलैंड स्वर्णभूमि का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि भगवान राम की मर्यादा और बुद्ध की करुणा हमारी साझी विरासत है। मोदी ने गुरु नानक देवजी की 550वीं जयंती के मौके पर सिक्का और तमिल ग्रंथ तिरुक्कुल का थाई अनुवाद भी जारी किया। पीएम यहां तीन दिवसीय दौरे पर आए हुए हैं।

मोदी ने कहा कि मुझे इस बात की भी खुशी है कि आप सभी थाईलैंड की अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। आप थाईलैंड और भारत के मजबूत व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्तों की सबसे मजबूत कड़ी हैं। आज हम भारत में योग्यता को, इनोवेटिव दिमाग को प्रोत्साहित कर रहे हैं। सूचना व संचार तकनीकी में भारत जो काम कर रहा है, उसका लाभ थाईलैंड को भी मिले, इसके लिए भी प्रयास चल रहे हैं। आज अगर भारत की दुनिया में पहुंच बढ़ी है तो, इसके पीछे आप जैसे साथियों का बहुत बड़ा रोल है।

छठ पूजा की दी शुभकामनाएं: पीएम ने कहा कि मैं थाईलैंड में रहने वाले सभी साथियों को छठ पूजा की शुभकामनाएं देता हूं। थाईलैंड की यह मेरी पहली आधिकारिक यात्रा है। उन्होंने कहा कि मैं थाई प्रधानमंत्री के न्योते पर भारतीय आसियान समिट में भाग लेने आया हूं। साथियों थाईलैंड के राजपरिवार का भारत के प्रति लगाव हमारे घनिष्ठ संबंधों का प्रतीक है।

आसियान देशों से संबंध मजबूत करना लक्ष्य: विदेश मंत्रालय के अनुसार, पीएम के इस दौरे का उद्देश्य भारत और आसियान देशों के बीच संबंधों को और मजबूती देना है। इस दौरान कई समझौते होंगे। इनमें आसियान देशों के विद्यार्थियों को भारत के आईआईटी संस्थानों में एक हजार पीएचडी स्कॉलरशिप देने का प्रस्ताव भी है। गत वर्ष जनवरी में भारत ने इंडो-आसियान समिट की 25वीं वर्षगांठ की मेजबानी की थी, जिसमें 10 आसियान नेताओं ने भागीदारी की थी।

जापान- बाढ़ और जमीन धंसने से 7 लोगों की मौत

टोक्यो: जापान की राजधानी टोक्यो के पूर्वी शहरों में भारी बारिश के चलते आई बाढ़ और जमीन धंसने की घटनाओं में करीब सात लोगों की मौत हो गई। शिबा प्रांत के मिदोरी जिले में जमीन धंसने से मलबे में दबकर तीन लोगों की मौत हो गई। निकटवर्ती इचिहारा शहर में भी जमीन धंसने से एक महिला की जान चली गई। वहीं नराता और चोनान शहर में दो गोताखोरों की मौत उनके वाहन डूबने से हो गई। शिबा प्रान्त में बचावकर्मी दो लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। वहीं फुकुशिमा में भी दो लोगों का पता नहीं चल पा रहा है। जापान में करीब दो हफ्ते पहले ‘हगिबिस’ तूफान के कारण आयी बाढ़ ने भी तबाही मचाई थी, जिसमें करीब 80 लोगों की जान चली गई थी। प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने शनिवार सुबह आपातकालीन कार्य बल की एक बैठक की और बिजली, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने का निर्देश दिया।