उन्नाव की ‘निर्भया’ को इंसाफ, कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा, 25 लाख का जुर्माना

उन्नाव रेप केस के दोषी भारतीय जनता पार्टी (BJP) से निष्कासित विधायक कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर की सजा पर शुक्रवार दोपहर 2 बजे फैसला सुनाया. जज धर्मेश शर्मा फिलहाल कुलदीप सेंगर के वकीलों की तरह से दिए गए हलफनामों को पढ़ रहे हैं.

सेंगर के दस्तावेजों के आधार पर उसकी कुल चल और अचल संपत्ति 44 लाख रुपये आंकी गई है. सुनवाई के दौरान सेंगर के वकील ने कहा कि इसका मूल्य फिलहाल घट चुका है, क्योंकि उनकी कार की कीमत कम हो चुकी है. इसके अलावा सेंगर की बेटी का मेडिकल में दाखिला कराया गया है, जिसकी फीस देने के बाद ये रकम और कम हो जाएगी.

वहीं पीड़िता के वकील ने कहा कि उन्नाव की पीड़िता का घर पूरी तरह से टूट गया है. इसके अलावा पीड़िता के पिता के पास 3 भाइयों के बीच कुल 3 बीघा जमीन है. पीड़िता के वकील ने कहा कि विधायक ने अपने अपराध को छुपाने के लिए न सिर्फ केस को वापस लेने का दवाब बनाया बल्कि विधायक होकर ऐसा काम किया. अगर देश को चलाने वाले लोग जिनपर जनता की रक्षा का दायित्व है, वो ऐसा करेंगे तो फिर उनको सज़ा भी अधिकतम होनी चाहिए.

उन्नाव केस में कुलदीप सेंगर दोषी करार

बता दें कि सेंगर को अपहरण और रेप का दोषी पाया गया है. सजा पर बहस के दौरान सीबीआई ने कोर्ट से अधिकतम सजा की मांग की है. 16 दिसंबर को दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने सेंगर को धारा 376 और पॉक्सो के सेक्शन 6 के तहत दोषी ठहराया था. जबकि 17 दिसंबर को सजा पर बहस की गई थी. इसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई से पहले कुलदीप सिंह सेंगर को अपनी आय और संपत्ति का पूरा ब्योरा देने का आदेश दिया था.

मंगलवार को सुनवाई के बाद दोषी विधायक को सजा सुनाने के लिए कोर्ट ने 20 दिसंबर यानी शुक्रवार का दिन तय किया था. उस दिन अदालत ने कहा था कि वह जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करना चाहते हैं. उन्नाव रेप कांड जघन्य साजिश, हत्या और दुर्घटनाओं से भरा हुआ है. इसलिए एक नज़र डालते हैं इस पूरे मामले पर.

नौकरी, मुलाकात और बलात्कार

उन्नाव के बांगरमऊ से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से मिलने के लिए उनके घर के करीब रहने वाली एक 17 वर्षीय किशोरी एक महिला के साथ 4 जून 2017 को नौकरी मांगने के लिए पहुंची थी. जो महिला किशोरी को लेकर वहां गई थी. उसका नाम था शशि सिंह. वो सेंगर की करीबी थी. उसी के बाद अचानक एक दिन उस किशोरी ने खुलासा किया कि विधायक ने उसके साथ बलात्कार किया है. लड़की और उसका परिवार थाने के चक्कर लगाते रहे.

अधिकारियों से गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. आखिरकार उन्होंने कोर्ट की शरण ली. तब जाकर पुलिस ने मामला दर्ज किया. इसके बाद शुरू हुआ किशोरी के परिवार पर ज्यादती का सिलसिला. लड़की पर लगातार समझौते का दबाव बनाया जा रहा था. उसे मुकदमा वापस लेने के लिए कहा जा रहा था. लेकिन ये मामला मीडिया की सुर्खियों में आ गया. सत्तारुढ़ पार्टी के विधायक के खिलाफ सूबे की पुलिस जांच में लीपापोती कर रही थी.

लड़की के परिवार को धमका रही थी. लेकिन पीड़िता ने इंसाफ की आस नहीं छोड़ी. मामला जब तूल पकड़ने लगा तो अप्रैल 2018 में जांच सीबीआई के हवाले कर दी गई. उसी वक्त सीबीआई की टीम ने आरोपी भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पूछताछ के लिए बुलाया. अधिकारियों को भी दाल में काला नजर आ रहा था. तभी इलाहाबाद उच्च न्यायालय पीड़िता को बड़ी राहत देते हुए इस मामले का संज्ञान लिया और सीबीआई को फरमान सुनाया कि फौरन आरोपी विधायक को गिरफ्तार करे.

सीबीआई ने अलग से प्राथमिकी दर्ज की और सेंगर को गिरफ्तारी के बाद एक सप्ताह के लिए न्यायिक हिरासत में रखा गया. मामला को लेकर जनता में आक्रोश बढ़ रहा था. लिहाजा सीबीआई की टीम भी तेजी से काम कर रही थी. सीबीआई ने जांच के बाद पीड़िता के बलात्कार के आरोप की पुष्टि कर दी. आरोपी विधायक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण की 4 धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया.

हत्या और हत्या का प्रयास

इस मामले में पहले तो विधायक सेंगर के भाई अतुल ने पीड़िता के पिता को बेरहमी से पीटा फिर उसे साजिश के तहत झूठे मामलों में फंसा कर पुलिस थाने भिजवा दिया. जहां उनकी हत्या कर दी गई. इस मामले में बहुत बाद में अतुल को गिरफ्तार किया गया. जब विधायक सेंगर जेल चला गया, तब भी वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आया. वो जेल में रहकर भी पीड़िता और उसके परिवार के खिलाफ साजिश रचता रहा.

28 जुलाई 2019 को, पीड़िता के अपने चाचा, चाची और वकील के साथ उनकी कार में केस के सिलसिले में यात्रा कर रही थी. तभी हाइवे पर एक ट्रक ने उनकी कार को टक्कर मार दी. जिससे पीड़िता के परिजनों की मौत हो गई, जबकि वो और उनके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए. इस मामले में सेंगर पर हत्या, हत्या की कोशिश, आपराधिक साजिश और आपराधिक धमकी के लिए मामला दर्ज किया गया. एफआईआर में सेंगर के भाई मनोज सिंह सेंगर, शशि सिंह और उनके सहयोगियों सहित 10 लोगों को नामजद किया गया.

भाजपा से निष्कासन

इस मामले में बीजेपी के आला नेता पहले कुलदीप सिंह सेंगर को बचाने की कोशिश करते रहे. यही नहीं जेल में बंद होने पर भी सेंगर लगातार नेताओं से मिल रहा था. वो खुद को बचाने के लिए हर तरह से कोशिशें करता रहा. लेकिन जब ये मामला देशभर में छाया और लोग सड़कों पर उतर आए.

विपक्ष ने योगी सरकार को घेरना शुरू कर दिया तो भाजपा ने उसे पार्टी से निलंबित कर दिया. अगस्त 2019 में बड़े पैमाने पर बीजेपी की यूपी सरकार को सार्वजनिक और राजनीतिक आक्रोश का सामना करना पड़ा. हालांकि निलंबन और बाद में निष्कासन के बाद भी सेंगर को विधायक के रूप में अयोग्य घोषित नहीं किया गया।।

बस्ती में प्लेटफॉर्म पर महिला ने जन्मा बच्चा

बस्ती: बस्ती रेलवे स्टेशन पर शनिवार देरशाम एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया। डेढ़ घंटे तक उसे कोई चिकित्सीय सहायता नहीं मिल पाई। सांऊघाट की स्वच्छाग्रही ने उसकी मदद की। करीब डेढ़ घंटे बाद आई 102 एम्बुलेंस से पहुंचे ईएमटी ने बच्चे की नाल काटकर अलग किया और जच्चा-बच्चा को जिला महिला अस्पताल पहुंचाया।

जच्चा की पहचान बीरू की पत्नी सोनी (33) के रूप में हुई है। वह संतकबीरनगर के मेहदावल की रहने वाली है। सोनी प्लेटफार्म नंबर दो ट्रेन का इंतजार कर रही थी। अचानक उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई और वह तड़पने लगी। इस दौरान रेलवे का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा। वहां से गुजर रही सांऊघाट ब्लॉक के सिहारी की स्वच्छाग्रही बिन्दुलता ने सहायता की और जीआरपी को सूचना दी। बिन्दुलता व एक अन्य महिला के सहयोग से सोनी ने बच्चे को जन्म दिया।

सूचना पाकर आरपीएफ इंस्पेक्टर नरेंद्र यादव व जीआरपी इंस्पेक्टर मार्कंडेय यादव पहुंचे। जवानों ने रेलवे चिकित्सक डॉ. मोहम्मद इकबाल को बुलाया तो उन्होंने अस्पताल में महिला स्वास्थ्यकर्मी न तैनात होने का हवाला देकर सहायता करने में असमर्थता जताई। जवानों ने 102 नंबर की एम्बुलेंस को सूचित किया। करीब एक घंटे 25 मिनट बाद एम्बुलेंस लेकर प्रदीप पहुंचे। इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन ने मौके पर ही नाल काटी। उसके बाद उसे जिला महिला अस्पताल पहुंचाया गया। जीआरपी थानाध्यक्ष मार्कंडेय यादव ने बताया कि दोनों को दोनों स्वस्थ्य हैं।

रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर आतंकी हमले में छह दोषी करार

रामपुर: रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर 12 साल पहले हुए आतंकी हमले के मामले में एडीजे कोर्ट ने छह लोगों को दोषी करार देते हुए फैसला सुरक्षित कर लिया। दोषी करार किये गए छह आतंकियों में दो पाकिस्तानी हैं। कोर्ट ने दो आरोपितों को दोष मुक्त करते हुए बरी कर दिया है। शनिवार को कोर्ट इन आरोपितों को सजा सुनायेगी।

  • दोषी करार किये गए छह आतंकियों में दो पाकिस्तानी

रामपुर में 31 दिसम्बर, 2007 की रात आतंकियों ने सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर उस समय हमला किया था, जब नये साल के स्वागत का जश्न देर रात तक मनाने के बाद पूरा शहर थककर सो चुका था। रात तीन बजे सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर आतंकियों ने हैंड ग्रेनेड और एके 47 से हमला कर दिया। इस हमले में मौके पर सात जवान शहीद हुए थे जबकि एक रिक्शा चालक की भी जान चली गई थी। आतंकी सीआरपीएफ सेंटर के हाईवे स्थित गेट से घुसे थे जिसके पास ही रेलवे क्रॉसिंग है। यहीं पर सीआरपीएफ के कुछ जवान आग जलाकर हाथ सेंक रहे थे और कुछ जवान गेट पर तैनात थे। इसी बीच सर्दी में शॉल के अंदर हथियार छुपाकर वहां आए आतंकियों ने अचानक से गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। अचानक हुए हमले से जवानों को संभले का मौका नहीं मिला। इसके बाद आतंकी गोलियां और बम बरसाते हुए सेंटर के अंदर तक घुस गए थे।

पुलिस ने इस हमले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। इन सभी आरोपितों को लखनऊ और बरेली की जेलों में कड़ी सुरक्षा में रखा गया था। रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर हमले के सभी आरोपितों को अपर जिला सत्र तृतीय न्यायालय में शुक्रवार को पेश किया गया। प्रतापगढ़ के कुंडा निवासी कौसर फारुखी तथा बरेली के बहेड़ी निवासी गुलाब खान को दोष मुक्त किया गया है। इसके अलावा कोर्ट ने हमले के मामले में पाक अधिकृत कश्मीर के इमरान, मोहम्मद फारूख, मुंबई गोरे गांव के फहीम अंसारी, बिहार के मधुबनी का सबाउद्दीन सबा, मुरादाबाद के मूंढापांडे निवासी जंग बहादुर बाबा खान और रामपुर के खजुरिया गांव के मोहम्मद शरीफ को दोषी मानकर फैसला सुरक्षित कर लिया है। शनिवार को कोर्ट इस मामले में अपना फैसला सुनायेगी।

जिला शासकीय अधिवक्ता सरदार दलविंदर सिंह (डम्पी) ने बताया कि मोहम्मद शरीफ, जंग बहादुर, इमरान शहजाद, मोहम्मद फारुख और सबाउद्दीन को आतंकी हमले में दोषी करार दिया गया है। मुंबई गोरेगांव के फहीम अंसारी से पासपोर्ट और पिस्टल वगैरह बरामद हुए थे लेकिन उसकी हमले में कोई भूमिका नहीं पाई गई है। सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर आतंकी हमले के आरोप में पुलिस ने जिन आठ लोगों को पकड़ा, उनमें फहीम अंसारी और सबाउद्दीन सबा मुंबई में हुए 26/11 के हमले में भी आरोपित थे। मुंबई पुलिस ने फहीम और सबा को रेकी करने का आरोपित बनाया था। हालांकि विवेचना के दौरान पुख्ता सबूत न मिलने पर दोनों मुंबई हाईकोर्ट से बरी हो गए थे।

जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह ने बताया कि कोर्ट का फैसला आने की संभावना के मद्देनजर सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम कर दिए गए हैं। कोर्ट परिसर के अलावा सभी महत्वपूर्ण स्थलों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे।